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जीवित मनुष्य का अधिकार मिलने के बाद ‘गंगा’ को कोर्ट का पहला नोटिस!

April 28, 2017
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नैनीताल हाईकोर्ट की तरफ से गंगा नदी को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने के बाद पहली बार गंगा को कोर्ट में पार्टी बनाया गया है। गंगा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने ‘गंगा’ को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।

खदरी खड़क माफ के ग्राम प्रधान स्वरूप सिंह पुंडीर ने याचिका दायर कर कहा कि 2015 में सरकार ने बिना ग्राम पंचायत के अनापत्ति प्रमाण पत्र के ऋषिकेश पालिका को 10 एकड़ भूमि ट्रेंचिंग ग्राउंड के लिए हस्तांतरित कर दी। जिस जगह पर ट्रेंचिंग ग्राउंड बन रहा है, वहां पर दोनों तरफ गंगा बहती है। इसलिए बरसात के दौरान ट्रेंचिंग ग्राउंड की सारी गंदगी नदी में बहेगी और इससे गंगा प्रदूषित होगी।

हाईकोर्ट ने याचिका को सुनने के बाद गंगा के बिहाफ पर चीफ सेक्रेटरी उत्तराखंड, डायरेक्टर नमामी गंगे को नोटिस भेजे हैं। साथ ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, नगर पालिका ऋषिकेश से भी जवाब मांगा गया है। सभी को आठ मई तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने 21 मार्च 2017 को अपने एक और एतिहासिक फैसले में गंगा और यमुना नदियों को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का आदेश दिया था। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि गंगा को मनुष्य की तरह पार्टी बनाया जा सकता है। कोर्ट ने डायरेक्टर नमामि गंगे, चीफ सेक्रेटरी उत्तराखंड। महाधिवक्ता उत्तराखंड को गंगा का गार्जियन बनाया है।

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