सावधान! …कार्य प्रगति पर है! सरकार की रफ्तारः 43 साल …13 किमी की सड़क! …आज तक नहीं बन पाई है पूरी!

जहां एक तरफ देश में मेक इन इंडिया के साथ डिजिटल इंडिया का भी सपना संजोया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ शहरों के साथ-साथ गांवों को भी डिजिटल इंडिया से जोड़ने की कवायद शुरू हो चुकी है लेकिन यदि हम बात करें विकास की गति को लेकर तो आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि हमारे देश का सिस्टम कितना बीमार है! खास बात यह है कि 1975 से कांग्रेस सहित एक बार जनता पाटी व चार बार भाजपा की सरकार भी राजस्थान में राज कर चुकी है! लेकिन क्योंकि सभी सरकार देशी हैं ...इसलिये अभी भी इंतजार है!

May 8, 2017
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1975 में पहुंची थी सड़क के लिए निर्माण सामग्री

जोधपुर से 39 किलोमीटर दूर डिगाड़ी गांव से गगाड़ी गांव जाने वाली 13 किलोमीटर सड़क जो जोधपुर से लोहावट व रामदेवरा जाने वाले मार्ग को जोड़ती है 43 साल पहले बननी शुरू हुई थी जो आज तक नहीं बन पाई है। 1975 में उसके गांव में सड़क बनाने के लिए निर्माण सामग्री डाली गई थी लेकिन आज तक सड़क नहीं बनी है! खास बात यह है कि 1975 से कांग्रेस सहित एक बार जनता पाटी व चार बार भाजपा की सरकार भी राजस्थान में राज कर चुकी है! लेकिन क्योंकि सभी सरकार देशी हैं …इसलिये अभी भी इंतजार है!

जहां एक तरफ देश में मेक इन इंडिया के साथ डिजिटल इंडिया का भी सपना संजोया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ शहरों के साथ-साथ गांवों को भी डिजिटल इंडिया से जोड़ने की कवायद शुरू हो चुकी है लेकिन यदि हम बात करें विकास की गति को लेकर तो आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि हमारे देश का सिस्टम कितना बीमार है।

राजस्थान के एक गांव की 13 किलोमीटर सड़क 43 साल पहले बनना शुरू हुई थी। वह आज तक पूरी नहीं बन पाई है। इस सड़क को बनवाने का बीड़ा एक युवा ने उठाया है और वह इस सिस्टम से सालों से जंग लड़ रहा रहा है।

खास बात यह है कि 1975 से कांग्रेस सहित एक बार जनता पाटी व चार बार भाजपा की सरकार भी राजस्थान में राज कर चुकी है! और इस समय भी भाजपा की ही सरकार है!

इस युवा ने हर वह प्रयास किया जिससे उसके गांव में सड़क बन जाए। उसने तहसीलदार से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी खत लिखे। वह अपने गांव से 367 किलोमीटर पैदल मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने पहुंचा, फिर भी उसके गांव को सड़क नहीं मिली। दरअसल, हम बात कर रहे हैं जोधपुर के जेलू गांव निवासी जसवंत सिंह की।

1975 में पहुंची थी सड़क के लिए निर्माण सामग्री

नीजि कम्पनी में काम करने वाले जसवंत ने सरकार को यह याद दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी कि अभी उसके गांव की सड़क का निर्माण होना बाकि है। उसने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री से लेकर तहसीलदार तक को पत्र लिखकर यह याद दिलाया कि 43 साल पहले साल 1975 में उसके गांव में सड़क बनाने के लिए निर्माण सामग्री डाली गई थी लेकिन आज तक सड़क नहीं बनी है।

सभी ने उस युवक को आश्वासन दिया कि जल्द यह सड़क बन जाएगी। आस-पास के गांवों के लोग इस युवक की सड़क को लेकर दिवानगी को देखकर उसे दिवाना तक कहने लगे हैं।

जोधपुर से 39 किलोमीटर दूर डिगाड़ी गांव से गगाड़ी गांव जाने वाली 13 किलोमीटर सड़क जो जोधपुर से लोहावट व रामदेवरा जाने वाले मार्ग को जोड़ती है। इस मार्ग पर करीब 40 से 45 ग्राम पंचायतें हैं। बड़ी संख्या में लोग इस सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं।

राजे सरकार ने की स्वीकृति रद्द

सालों संघर्ष करने के बाद साल 2013 में प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने इस सड़क के निर्माण के लिए 285 लाख रूपए के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी थी, लेकिन 2014 मे आई नई प्रदेश सरकार ने इस स्वीकृति को रद्द कर दिया। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आचार संहिता लगने के दौरान इस प्रस्ताव को पास किया था।

इस बात को लेकर इन गांवों के लोगों में गजब का आक्रोश नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने तो यहां तक निश्चिय कर लिया कि यदि यह रोड नहीं बनी तो वे इस बार होने वाले मतदान का बहिष्कार करेंगे।

…उम्मीद अभी बाकी है

बरहाल, चुनावों के नजदीक आते ही इस सड़क के निर्माण को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। क्षेत्रीय विधायक भैराराम सियोल ने सड़क को बनवाना अपने कार्यों की प्राथमिकता में एक नम्बर पर बताया है लेकिन अभी भी सड़क भविष्य के गर्त में है। जय भारत!

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