जब अविवाहित लड़कियों के गर्भवती होने पर …वीरान टापू पर मरने के लिए छोड़ दिया जाता था!

उस दौरान अधिकांश लड़कियां तैरना नहीं जानती थीं। इसलिए ऐसी लड़कियों के सामने दो रास्ते बचते थे, एक तो पानी कूद कर मर जाएं या ठंड और भूख से मर जाएं!

May 1, 2017
74 Views

एक ऐसा समय था जब युगांडा में अविवाहित लड़कियों के प्रेग्नेंट होने पर उन्हें मरने के लिए एक वीराने टापू पर छोड़ देने का रिवाज था। इनमें से कुछ ही किस्मत वाली होती थीं जिन्हें बचा लिया जाता था। इन्हीं बचाई गई लड़कियों में से एक हैं माउदा कितारागाबिर्वे जो 12 साल की उम्र में गर्भवती हुईं और उन्हें टापू पर छोड़ दिया गया था।

इस टापू को अकाम्पीन या ‘पनिशमेंट लैंड’ कहा जाता है। वो बताती हैं, जब मेरे परिवार को पता चला तो मुझे एक नाव में बिठाकर अकाम्पीन ले गए। मैंने वहां बिना भोजन-पानी के चार रातें बिताईं।

मछुआरे ने बचाई जान

उन्होंने बताया कि वहां ठंड थी और मौत होना तय लग रहा था। लेकिन पांचवें दिन वहां एक मछुआरा पहुंच गया और वो उन्हें अपने घर ले गया। पहले उन्हें संदेह हुआ, लेकिन मछुआरे ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वो उन्हें पत्नी की तरह रखेगा। वो इस ‘पनिशमेंट लैंड’ से सटे लेक बुनयोन्यी से नाव से 10 मिनट की दूरी पर स्थित गांव काशुंग्येरा में रहती हैं।

माउदा के पोते और टूर गाइड टाइसन नामवेसिगा ने उन्हें बताया कि मैं रुकिगा भाषा में बात कर सकती हूं। उनके गिर चुके दांतों वाले चेहरे पर मुस्कान उभरी। उस समय उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक होगी, लेकिन उनके परिवार का मानना है कि उनकी उम्र 106 वर्ष है।

बैकिगा समाज की परंपरा के अनुसार, लड़की शादी के बाद ही प्रेग्नेंट हो सकती थी। कुंवारी लड़की की शादी के एवज में मवेशियों के रूप में दहेज मिलता है। अविवाहित गर्भवती लड़की को परिवार के लिए सिर्फ शर्मिंदगी का कारण ही नहीं माना जाता था, बल्कि आर्थिक फायदे के छिन जाने के रूप में भी देखा जाता था। इसीलिए परिवार इन लड़कियों को मरने के लिए टापू पर छोड़ दिया करते थे।

ये रिवाज 19वीं शताब्दी में मिशनरी और उपनिवेशवादियों के पहुंचने से पहले तक चलता रहा और तब बंद हुआ जब इन्हें गैरकानूनी बना दिया गया। उस दौरान अधिकांश लड़कियां तैरना नहीं जानती थीं। इसलिए ऐसी लड़कियों के सामने दो रास्ते बचते थे, एक तो पानी कूद कर मर जाएं या ठंड और भूख से मर जाएं।

टापू पर छोड़ने और झरने में फेंकने का रिवाज

माउदा बताती हैं, उस समय मैं 12 साल की रही होऊंगी, झील के बीचोबीच किसी टापू पर अकेले छोड़ दिए जाने से किसी को भी डर लगेगा। युगांडा के दूसरे हिस्से और आज के रुकुंगिरी जिले में ऐसी लड़कियों को किसीजी फॉल्स से नीचे फेंक देने का रिवाज था। यहां से कोई जीवित नहीं बचा।

जब माउदा मछुआरे साथ गांव पहुंचीं तो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं। दशकों से वो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। उनके घर पर नियमित रूप से टूरिस्टों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन सबसे दुखद बात ये हुई कि उस प्रग्नेंसी के दौरान हुई मारपीट में उनका गर्भ गिर गया।

वो कहती हैं कि उनकी तीन बेटियां हैं, लेकिन अगर इनमें से कोई शादी के पहले प्रेग्नेंट होती है वो उनके साथ ऐसा वर्ताव नहीं करेंगी। इन लड़कियों को सजा देने को स्थानीय भाषा में ओकुहीना कहते हैं और इसी नाम से इस टापू का स्थानीय नाम अकाम्पीन पड़ा।

माउदा बताती हैं, टापू पर दूसरी लड़कियों के ले जाने के बारे में मैंने सुना है, लेकिन उनमें से किसी के बारे में नहीं जानती। जिस शख्स ने उन्हें इस रास्ते पर डाला उसे दोबारा कभी नहीं देखा गया और कई सालों बाद उन्होंने उसकी मौत की खबर सुनी।

उनके पति की 2001 मौत हो गई। उनके बारे में वो कहती हैं, वो मुझे प्यार करता था। उसने वाकई मेरी देखभाल की। उनके अनुसार, हमारे छह बच्चे हुए और वो अपनी मौत तक इसी घर में मेरे साथ रहा।

वो मुस्कराते हुए कहती हैं, ईसाई बनने के बाद मैंने सबको माफ कर दिया, उस भाई को भी जो मुझे टापू तक छोड़ने गया था। मैं अपने परिवार से मिलने जाऊंगी। माना जाता है कि माउदा उस टापू पर छोड़ी जाने वाली अंतिम लड़की थीं क्योंकि ईसाइयत आने के बाद ये रिवाज कम हो गया और कड़े कानूनों के बाद इस पर पाबंदी लग गई। अभी भी अविवाहित प्रेग्नेंट महिलाओं को सालों तक अच्छी नजर से नहीं देखा जाता।

Get the best viral stories straight into your inbox!

Don't worry, we don't spam

Leave a Comment

Your email address will not be published.