पाक के …‘जनी शिकार’ की इजाजत दे सरकार!

झारखंड की महिलाओं का ...‘जनी शिकार’: ...जब मर्दों के वेश में सड़कों पर शिकार के लिए निकलती हैं महिलाएं!

May 2, 2017
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12 का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है। जैसे एक साल में महीन 12 होते हैं। कुंभ का मेला 12 साल में होता है। अर्थात हम 12 को कई मायनों में याद रखते हैं।

ठीक ऐसा ही 12 साल में होने वाला `जनी शिकार’ का नजारा इस 29 अप्रैल को रांची की सड़कों पर देखने को मिला। यहाँ पुरुषों का वेश धारण कर जनजातीय महिलाओं ने ‘जनी शिकार’ किया। जनी शिकार यानी जानवरों का शिकार। बताया जाता है कि यह जनी शिकार 12 साल में एक बार होता है।

यह परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है जो हर 12 साल में आयोजित होती है। कहते हैं कि कई सालों पहले रोहतासगढ़ के सिनगी दई नाम की वीरांगना के पुरुषों का वेश बनाकर अपना गढ़ बचाने के लिए युद्ध करने और उसमें विजय प्राप्त करने की याद में ये परंपरा शुरू हुई थी।

पहले जनी शिकार में निकली महिलाओं को रास्ते में जो भी जानवर (बकरी, सुअर, मुर्गा, खस्सी आदि) मिलते था उनका शिकार कर लेती थी लेकिन ऐसा करने से अब जानवरों के मालिकों से दुश्मनी होने लगी है।

..जिस तरह से पाकिस्तान की हैवानियत दिन-प्रति-दिन बढती जा रही हैं उसे देख कर हमें लगता है कि मोदी जी को हमारी फौज को पाकिस्तान का ‘जनी शिकार’ करने का हुक्म दे देना चाहिए!

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