‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ से प्रकाश झा ने उठाया पर्दा!

प्रकाश झा: पुरुष प्रधान समाज औरत के नजरिये से औरतों की बात नहीं सुनना चाहता!

March 22, 2017
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अनेक अच्छी फिल्मों के साथ मृतुदंड, दामुल और राजनीति जैसी फिल्मों में महिलाओं के सशक्त किरदार दिखाने वाले निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा का कहना है की भारत में महिलाओं को अपने पति के सामने यौन इच्छाएं प्रकट करने की आजादी नहीं है।

हाल ही में उनके प्रोडक्शन हाउस से आई ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने सर्टिफिकेट देने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि फिल्म महिला प्रधान है और उसमें महिलाओं की सैक्सशुयलटी को दर्शाया गया है।

प्रकाश झा ने कहते हैं कि यह फिल्म पुरुष प्रधान समाज को नहीं ललकार रही है, पर महिलाओं के नजरिए से कहानी बता रही है। उनके मुताबिक, समाज पुरुष प्रधान है इसलिए औरत के नजरिये से औरतों की बात सुनना नहीं चाहता।

बॉलीवुड को भी जिम्मेदार ठहराते हुए प्रकाश झा का मनना है कि फिल्मों में महिलाओं को हमेशा से ही पुरुषों की मानसिकता के नजरिए से ही दर्शाया जाता है और जहाँ महिला अपनी लैंगिकता की बात करती है उसे बदचलन करार दे दिया जाता है। प्रकाश झा आगे कहते हैं, महिलाओं की लैंगिकता पर हमें बात करने की भी आजादी नहीं है।

उनके मुताबिक, आम तौर पर हमारे देश में महिलाओं को अपने पति और शौहर से अपनी लैंगिकता की बात करने की आजादी ही नहीं है। तो कम से कम उसकी शुरुआत तो हो। प्रकाश झा को सीबीएफसी से भी कोई शिकायत नहीं है क्योंकि वो दिशा निर्देश का पालन कर रही है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा सरकार द्वारा श्याम बेनेगल कमेटी की रिपोर्ट पर जल्द ही फैसला होगा।

वो कहते हैं, फिल्म इंडस्ट्री का देश में कई मायनों में योगदान है। हिंदी भाषा को फैलाने में, देश को जोड़ने में, देश के प्रति भक्ति, आस्था और जोश जगाने में योगदान है। लेकिन जब फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों की बात आ जाती है तो सरकार चूक जाती है जो नहीं होना चाहिए।

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