भारत और पाकिस्तान के बीच जासूसी के कुछ चर्चित चर्चे!

Some spying stories between India and Pakistan!

April 11, 2017
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सालों से ही भारत और पाकिस्तान के तल्ख रिश्तों के बीच जासूसी के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में भी दिल्ली पुलिस ने पाकिस्तान उच्चायोग के एक अधिकारी महमूद अख्तर को जासूसी के आरोप में हिरासत में लेकर 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने को कहा था। इसके बाद और 6 कर्मचारियों को देश छोड़ने को कहा गया। बदले में पाकिस्तान ने भी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के कई अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाते हुए पाकिस्तान छोड़ने का फरमान सुना दिया। अब तक कई फिल्में भी दोनों देशों के बीच जासूसी के किस्सों पर बन चुकी है। रियल लाइफ में कई भारतीय जासूसी के पाकिस्तान से जुड़े किस्से चर्चा में रहे।

कुलभूषण जाधव

भारत-पाकिस्तान के बीच जासूसी के मामले में सबसे ताजा नाम चर्चा में है कुलभूषण जाधव का। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव पर भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए जासूसी का आरोप लगाते हुए मौत की सजा सुनाई है। कुलभूषण जाधव को 3 मार्च, 2016 को ईरान से पाकिस्तान में अवैध घुसपैठ का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार किया गया और जासूसी का आरोप लगा दिया गया। पाकिस्तान का दावा था कि वह एक रिसर्च एंड एनैलेसिस विंग (रॉ) एजेंट हैं।

जबकि भारत का दावा है कि वे नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं और कानूनी तौर पर ईरान में अपना व्यापार करते थे। उनका भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। पाकिस्तान ने पिछले साल जाधव के कथित कबूलनामे का एक वीडियो भी जारी किया था। हालांकि, इसपर सवाल भी उठे। वीडियो सामने आने के बाद दावा किया गया कि 358 सेकेंड के इस वीडियो में 102 कट थे। कई जानकारों ने दावा किया कि जाधव से मजबूरन आरोपों को कबूल करवाया गया था।

सरबजीत सिंह

सरबजीत सिंह का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा। भारत की ओर से रिहाई की तमाम कोशिशों के बीच 2 मई 2013 को पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में कैदियों ने हमला कर सरबजीत सिंह की हत्या कर दी। इसी के साथ सरबजीत का किस्सा थम गया। बाद में उनके किस्से पर फिल्म भी बनी। सरबजीत सिंह 23 साल तक पाकिस्तान की जेल में रहे। 28 अगस्त 1990 को पाकिस्तान ने अपने इलाके में सरबजीत को गिरफ्तार करने का दावा किया। उनके परिवार ने कहा कि शराब के नशे में वह पाकिस्तान की सीमा में घुस गया, क्योंकि तब तार के बाड़े नहीं होते थे और एक पाकिस्तानी कर्नल ने उसे पकड़कर सात दिन तक रखा, फिर अदालत में पेश कर दिया।

पाकिस्तान की अदालत में उसे मंजीत सिंह के नाम से पेश किया गया, क्योंकि इसी नाम से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया। उन पर भारत के लिए जासूसी करने के आरोप भी लगे। उनकी बहन दलबीर कौर ने लगातार अभियान चलाकर भारत सरकार से रिहाई के लिए कोशिश करने को कहा। रिहाई के लिए भारत के बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार पाकिस्तान की जेल में सरबजीत की हत्या कैदियों द्वारा कर दी गई।

कश्मीर सिंह

35 साल तक पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद छूटकर भारत आए कश्मीर सिंह का मामला भी काफी सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में उन पर भारतीय जासूस होने का आरोप लगाया गया था लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। पाकिस्तान से लौटने के बाद कश्मीर सिंह ने बताया कि वह पाकिस्तान में जासूस नहीं थे। पंजाब के होशियारपुर जिले के नानगल चोरां गांव में कश्मीर सिंह ने बताया कि मीडिया ने पाकिस्तान में उनकी भूमिका को तोड़-मरोड़कर पेश किया। उन्होंने बेबाक लहजे में कहा कि वह पाकिस्तान में तस्करी के लिए गए थे और पाक सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार कर जासूसी का आरोप लगा दिया गया।

सुरजीत सिंह का किस्सा

2012 में 69 वर्षीय सुरजीत सिंह पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत लौटे। 30 साल बाद भारत लौटे सुरजीत ने भारतीय सीमा में एंट्री करते ही वाघा बॉर्डर पर कहा – मैं आपको क्या बताऊं, मुझसे ना पूछो, मुझसे मत निकलवाओ….मैं जासूसी करने वास्ते गया था। इसके बाद सेना के अधिकारी और पुलिस वाले उन्हें अपने साथ ले गए। सुरजीत सिंह ने बताया था कि एक अन्य बहुचर्चित भारतीय सरबजीत से उनकी नियमित मुलाकात होती थी और वे हर तरह की बात करते थे। सुरजीत पर भी आरोप था कि उन्होंने भारत के लिए जासूसी की। पहले उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी लेकिन बाद में राष्ट्रपति गुलाम इसहाक खान ने उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

रवींद्र कौशिक

पाकिस्तान में भारतीय जासूसी के किस्सों में सबसे चर्चित मामला रहा है रवींद्र कौशिक का। उनके जीवन पर सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ भी बन चुकी है। रविंद्र कौशिक की मौत भी पाकिस्तानी की ही एक जेल में हुई थी। लेकिन मौत से पहले के उनके कारनामे किसी फिल्म से कहीं ज्यादा रोमांचक कहे जा सकते हैं। वो न सिर्फ भारत के लिए जासूसी करने पाकिस्तान गए बल्कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना में मेजर तक का पद हासिल कर दिया।

बताया जाता है कि पाकिस्तानी सेना में रहते हुए उन्होंने भारत को बहुत अहम जानकारियां दीं। कौशिक राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रहने वाले थे। 1983 में कौशिक का राज खुल गया। दरअसल रॉ ने ही एक अन्य जासूस कौशिक से मिलने पाकिस्तान भेजा था जिसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने पकड़ लिया। उससे पूछताछ के दौरान कौशिक की पहचान भी उजागर हो गई। मियांवाली की जेल में ही 2001 में टीबी और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।

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