वाहन उद्योग को तगड़ा झटकाः बीएस-3 वाहनों की बिक्री व पंजीकरण बंद!

1 अप्रैल से बीएस-4 मानकों का अनुपालन करना होगा

March 30, 2017
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वाहन उद्योग को दूसरी बार उच्चतम न्यायालय के आदेश से झटका लगा है। पहला झटका दिसंबर 2015 में लगा था जब अदालत ने 2000 सीसी या इससे ज्यादा क्षमता वाले डीजल यात्री वाहनों की बिक्री व पंजीकरण पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी थी। आठ महीने लंबी पाबंदी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लक्जरी वाहनों की मांग पर भारी असर डाला था। इसने लक्जरी कार निर्माता मर्सिडीज, जेएलआर ऑडी और बीएमडब्ल्यू पर गंभीर असर डाला था। अन्य कंपनी मसलन टोयोटा व एमऐंडएम भी प्रभावित हुई थी। राहत पाने में इसे आठ महीने लगे और जब कंपनियां कीमत पर एक फीसदी उपकर देने पर सहमत हुई तब ऐसा हो पाया।

वाहन कंपनियों की बड़ी चुनौती अदालत को यह समझाना था कि डीजल यात्री वाहन दिल्ली की खराब आबोहबा के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं है। उद्योग निकाय सायम ने आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें डीजल कारों का योगदान काफी कम बताया गया है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में सबसे ज्यादा 38 फीसदी योगदान सड़कों की धूल का है, इसके बाद वाहन का नंबर आता है जो 20 फीसदी है जबकि देसी ईंधन के जलने से 12 फीसदी और उद्योग से 12 फीसदी प्रदूषण होता है। बाकी डीजल जेनरेटर, निर्माण आदि से। वाहनों के 20 फीसदी योगदान में 46 फीसदी ट्रक, दोपहिया 33 फीसदी और यात्री कार का योगदान 10 फीसदी है। उद्योग ने डीजल कार की छवि के लिए काफी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा।

उद्योग अब दूसरी बार अदालत को समझाने में नाकाम रहा है जबकि सरकार का समर्थन इसे हासिल है। अदालत ने बीएस-3 वाहनों की बिक्री व पंजीकरण पर एक अप्रैल से रोक लगा दी। 1 अप्रैल से बीएस-4 वाहनों की बिक्री व पंजीकरण होंगे। दोपहिया वाहन कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने अदालत से कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी को 1,600 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। सरकार ने भी अदालत से कहा कि बीएस-3 वाहनों की इन्वेंट्री की बिक्री की अनुमति दी जानी चाहिए।

अदालत के इस फैसले से वाहन विनिर्माताओं, खासकर टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड और हीरो को खासा झटका लग सकता है क्योंकि इन कंपनियों के पास इस माह के अंत तक बीएस-3 मानदंड के करीब 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये मूल्य के वाहन बिना बिके रह सकते हैं। कंपनियां अपने स्टॉक को खत्म करने के लिए 1 अप्रैल से आगे की मोहलता मांग रही थीं। अब इन कंपनियों को अपने बीएस-3 वाहनों को खपाने के लिए भारी छूट देनी होगी और बड़े पैमाने पर उन्हें निर्यात करना होगा या उन वाहनों को बीएस-4 में उन्नयन करने के लिए खासा निवेश करना होगा।

उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति मदन लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता के खंडपीठ ने कई दिनों की सुनवाई के बाद आज यह फैसला सुनाया। अदालत के इस फैसले से प्रभावित होने वाली अन्य कंपनियों में एसएमएल इसूजु, वीईसीवी और होंडा मोटरसाइकिल ऐंड स्कूटर इंडिया शामिल हैं। इस माह के अंत तक इन कंपनियों और उनके डीलरों के पास करीब 5 से 6 लाख बीएस-3 वाहन बिना बिके रह सकते हैं, जिनमें से ज्यादातर दोपहिया और वाणिज्यिक वाहन होंगे।

बीएस-4 पर अधिसूचना जारी करने के बाद सरकार ने अदालत से कहा था कि 31 मार्च के बाद भी इन वाहनों की बिक्री की जा सकती है। अधिसूचना में कहा गया था कि वाहन कंपनियों को 1 अप्रैल, 2017 से बीएस-4 मानकों का अनुपालन करना होगा लेकिन 31 मार्च से पहले बने वालों की बिक्री और पंजीकरण के बारे में इसमें कुछ नहीं कहा गया था।

अदालत ने कहा, ऐसे वाहनों की संख्या देश में कुल वाहनों की तुलना में भले ही काफी कम हो लेकिन लोगों का स्वास्थ्य विनिर्माताओं के व्यावसायिक हितों से कहीं ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।श् अदालत ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च और इससे पहले बिके ऐसे वाहनों का पंजीकरण 1 अप्रैल से पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर ही होगा। अदालत के इस फैसले का असर वाहन कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर हीरो मोटोकॉर्प का शेयर 3 फीसदी गिरकर 3,223 रुपये पर बंद हुआ। इसी तरह अशोक लीलैंड 2.87 फीसदी गिरावट के साथ 84 रुपये पर बंद हुआ। फोर्स मोटर्स में 1.84 फीसदी और एसएमएल इसूजु में 1.64 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि जिन कंपनियों पर इसका कम असर पड़ेगा या असर नहीं पड़ेगा उनके शेयरों में तेजी देखी गई।

बजाज के पास बीएस-3 के काफी कम वाहन रह सकते हैं। बजाज ऑटो के अध्यक्ष (कारोबार विकास) एस रविकुमार ने कहा कि कंपनी के पास यह विकल्प होगा कि वह डीलरों से बिना बिके वाहनों को वापस मंगा ले और उसे निर्यात कर दे। हालांकि निर्यात सभी कंपनियों के लिए आसान विकल्प नहीं होगा। अगले तीन दिनों तक डीलरों के यहां स्टॉक खत्म करने के लिए भारी छूट दी जा सकती है।

अशोक लीलैंड के प्रबंध निदेशक और सायम के अध्यक्ष विनोद दसारी ने कहा कि उनकी कंपनी पर इसका मामूली असर पड़ेगा और कंपनी बिना बिके वाहनों को निर्यात करने की संभावना तलाशेगी या उसे अपडेट करेगी।

अदालत ने कहा कि विनिर्माता बीएस-4 के लागू होने की समयसीमा से अच्छी तरह वाकिफ थे लेकिन पता नहीं किस वजह से उन्होंने इस दिशा में सक्रियता नहीं दिखाई। अदालत ने कहा कि मारुति सुजूकी जैसी प्रमुख कंपनी ने खुद को पूरी तरह बीएस-4 के अनुकूल कुछ साल पहले ही ढाल लिया था।

उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने 1 अप्रैल से बीएस-1 उत्र्सजन मानक वाले वाहनों की बिक्री पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की थी। इसके बाद भी कंपनियां बीएस-4 मानक के अनुसार वाहनों का विनिर्माण करने पर जोर नहीं दिया।

बजाज ऑटो ने अदालत में याचिका दायर कर 31 मार्च के बाद भी बीएस-3 वाहनों की बिक्री करने पर रोक लगाने की मांग की थी। कंपनी ने अन्य से पहले ही बीएस-4 अनुपालन के तहत वाहनों का उत्पादन शुरू कर दिया था।

अदालत ने इसका उल्लेख किया कि सॉलिसिटर जनरल ने केंद्र सरकार की ओर से 1 अप्रैल से देश भर में बीएस-4 अनुपालन वाले ईंधन की उपलब्धता का भरोसा दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों ने बीएस-4 के मुताबिक ईंधन उत्पादन करने के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

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