एनपीएस, पीपीएफ और ईएलएसएस में कौन है बेहतर!

Difference between एनपीएस, पीपीएफ और ईएलएसएस!

February 28, 2017
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बहुत से लोग जिनमें आम बचत करने वाले भी सामिल होते है अक्सर यह जानना चाहते हैं कि नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) व पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) में से किसे चुनें। यह सवाल अतार्किक नहीं है। मोटे तौर पर इन दोनों स्कीमों में निवेश का उद्देश्य समान है। वित्त वर्ष के अंत में जब बचतकर्ता टैक्स बचाने के लिए अपना टैक्स सेविंग कोटा समाप्त होने की समस्या से रूबरू होते हैं, तब ये दोनों स्कीमें करीब करीब समतुल्य होती हैं। ये एक-दूसरे की विकल्प भी हैं, क्योंकि दोनों ही धारा 80सी के तहत एक लाख रुपये के टैक्स छूट दायरे में आती हैं।
टैक्स बचत को छोड़ दिया जाए तो ये दोनों स्कीमें पूरी तरह से एक-दूसरे से अलग हैं। एक तरफ पीपीएफ को हम लोग अच्छी तरह से समझते हैं, क्योंकि यह एक अच्छा पुराना फिक्सड डिपॉजिट है, साथ ही यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित है। इसमें जमा होने वाली रकम 16 साल तक के लिए लॉक होती है। हालांकि सात साल के बाद आंशिक निकासी की जा सकती है। इसके ब्याज व मूलधन की निकासी पूरी तरह से टैक्स मुक्त है। ब्याज तत्कालीन बैंक एफडी के ब्याज से मामूली रूप से कम होता है, लेकिन टैक्स बेसिस पर यह रिटर्न एफडी से ज्यादा होता है।
दूसरी तरफ एनपीएस पूरी तरह से रिटायरमेंट सेविंग सिस्टम है। इसमें रकम 60 साल की उम्र तक के लिए लॉक होती है। सेवानिवृत्ति के बाद भी 40 फीसद रकम अनिवार्य रूप से बीमा कंपनियों के एन्युटी उत्पादों में जमा करनी होती है। इससे आपको जीवनभर के लिए नियमित आय सुनिश्चित होती है। इसके अलावा एनपीएस बाजार से जुड़ा उत्पाद है। इसमें आप 50 फीसद रकम के लिए इक्विटी निवेश विकल्प चुन सकते हैं। इससे एफडी के मुकाबले इसका रिटर्न काफी ज्यादा रह सकता है। हालांकि एनपीएस का यह रिटर्न करयोग्य है। रकम निकालने पर आपको कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। एनपीएस में 30 पर्सेंट ब्रैकेट वालों को भी 15,000 रुपये का अतिरिक्त टैक्स बेनेफिट मिलता है।

लेकिन सबसे साफ सुथरा इक्विटी आधारित बचत विकल्प असल में पुराने ईएलएसएस म्यूचुअल फंड ही हैं। हालांकि इनकी प्रबंधन लागत एनपीएस की तुलना में ज्यादा है। इक्विटी इन्वेस्टमेंट होने के कारण इन पर न तो कोई टैक्स देनदारी होती है, और न ही समय सीमा की कोई लंबी बंदिश। निवेश के समय भी इन्हें पीपीएफ व एनपीएस के समान ही एक लाख तक की टैक्स छूट सीमा का लाभ हासिल है। इनमें निवेश का लॉक इन पीरियड केवल तीन साल है। लॉक इन अवधि कम होने के कारण ईएलएसएस शुद्ध रूप से रिटायरमेंट सेविंग विकल्प नहीं हैं, लेकिन इनमें दूसरे विकल्पों से ज्यादा लाभ है।
लेकिन हमारे पास आम तौर पर निवेश के लिए सीमित मात्रा में धन रहता है, और हमें हमेशा यह दुविधा रहती है कि अधिकतम दीर्घकालिक लाभ के लिए शेयरों में निवेश करना चाहिए, या अपने कर-बोझ को कम करने के लिए कर बचत वाले (मगर कम रिटर्न देने वाले) निवेश में धन लगाना चाहिए?
यह एक कठिन निर्णय है, और अधिकांश बार कर-बचत वाले निवेश की जीत होती है। अंत में हम केवल 7-8ः रिटर्न देने वाली योजना में निवेश करते हैं, और स्टॉक द्वारा दिए जाने वाले बेहतर रिटर्न को छोड़ देते हैं – और यह होता है आयकर बचने के चक्कर में।
लेकिन क्या हम इन दोनों योजनाओं के श्रेष्ठ पहलुओं को जोड़ सकते हैं? अगर इक्विटी में निवेश और कर बचत दोनों एक साथ हो जाए, तो फिर क्या बात है! मगर क्या यह संभव है?
जी हाँ, बिलकुल। यह इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ई.एल.एस.एस.) के उपयोग से किया जा सकता है।
इक्विटी लिंक्ड बचत योजना (ईएलएसएस) में किया गया निवेश आयकर अधिनियम (आईटी) की धारा 80 सी के अंतर्गत लाभ के लिए पात्र है। छूट की अधिकतम सीमा धारा 80 सी के तहत 1 लाख रुपये प्रति वर्ष है।
ईएलएसएस म्युचुअल फंड का एक विशेष वर्ग या प्रकार है, जो मुख्य रूप से शेयरों में निवेश करता है। यह काफी तरह से विविध इक्विटी फंड जैसे हैं। विविध इक्विटी फंड और ईएलएसएस म्युचुअल फंड के बीच फर्क सिर्फ इतना है, कि ईएलएसएस में 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि होती हैं। इसका मतलब है कि एक बार आप ईएलएसएस एमएफ में निवेश करते हैं तो, आप 3 साल की अवधि के लिए अपने निवेश को वापस नहीं ले सकते।
एक म्युचुअल फंड (एमएफ) के लिए 3 वर्ष लॉक-इन की अवधि? सुनके अजीब लग सकता है, लेकिन अगर हम दूसरे कर बचत निवेश के रास्तों के साथ तुलना करें, तो हम देखेंगे की न्यूनतम लॉक-इन बैंक सावधि जमा (एफडी) में है (5 वर्ष), और यह यह सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में 15 साल तक जा सकता है!
तो निष्कर्ष यह है की ईएलएसएस में लॉक-इन की अवधि बाकी सभी कर बचत निवेश के मार्गों से कम है।

लॉक-इन का फायदा
यह लॉक-इन आपकी मदद ही करता है। आमतौर पर कोष प्रबंधकों को म्युचुअल फंड के कोष का एक हिस्सा (लगभग 7-10ः के आसपास) नकदी के रूप में रखना पड़ता है, ताकि वे वापसी ध् रिडेम्पशन की मांग को पूरा कर सकें। यह नकद बहुत ही कम अवधि के निवेश में निवेशित होती है, और बहुत ही अल्प आय पैदा करती है। यह म्युचुअल फंड के कुल लाभ पर प्रभाव डालती है।
ईएलएसएस का कोष प्रबंधक जानता है कि आपको अपने पैसे 3 साल के लिए वापस नहीं लेने हैं। इस वजह से वह आपके पूरे पैसों का निवेश कर सकता है, और इस प्रकार, आपके निवेश का कोई हिस्सा नकदी के रूप में निष्क्रिय नहीं होता। इस वजह से आपको ईएलएसएस में अन्य म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले बेहतर लाभ मिल सकता है।

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